पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग
पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग
दोहा ९६ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग मल मूल। नर अरु नारि अधर्म रत सकल निगम प्रतिकूल॥ ९६ (ख) ॥
अर्थ
हे प्रभो! पूर्व कल्प एक युग कलियुग पापों का मूल था, जिसमें पुरुष और स्त्री सभी अधर्मपरायण और वेद के विरोधी थे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का दोहा ९६ (ख) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा