बादहिं सूद्र द्विजन्ह सन हम तुम्ह
बादहिं सूद्र द्विजन्ह सन हम तुम्ह
दोहा ९९ (ख) · उत्तरकाण्ड
दोहा पाठ
बादहिं सूद्र द्विजन्ह सन हम तुम्ह ते कछु घाटि। जानइ ब्रह्म सो बिप्रबर आँखि देखावहिं डाटि॥ ९९ (ख) ॥
अर्थ
शूद्र ब्राह्मणों से विवाद करते हैं [और कहते हैं] कि हम तुमसे कुछ कम हैं? जो ब्रह्म को जानता है वही श्रेष्ठ ब्राह्मण है। [ऐसा कहकर] वे उन्हें डाँटकर आँखें दिखलाते हैं।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का दोहा ९९ (ख) है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा