अवध प्रभाव जान तब प्रानी
अवध प्रभाव जान तब प्रानी
चौपाई ४, दोहा ९७ के अंतर्गत · उत्तरकाण्ड
चौपाई पाठ
अवध प्रभाव जान तब प्रानी। जब उर बसहिं रामु धनुपानी॥ सो कलिकाल कठिन उरगारी। पाप परायन सब नर नारी॥ ४ ॥
अर्थ
अवध का प्रभाव जीव तभी जानता है, जब हाथ में धनुष धारण करने वाले श्रीरामजी उसके हृदय में निवास करते हैं। हे गरुड़जी! वह कलिकाल बड़ा कठिन था। उसमें सभी नर-नारी पाप-परायण (पापों में लिप्त) थे।
संदर्भ
यह उत्तरकाण्ड के “काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म-वृत्तांत और कलियुग की महिमा एवं भक्ति की शरण का वर्णन है।
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काकभुशुण्डि के पूर्वजन्म, कलि महिमा