राम राम हा राम पुकारी

चौपाई ३, दोहा ५ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

राम राम हा राम पुकारी। हमहि देखि दीन्हेउ पट डारी॥ मागा राम तुरत तेहिं दीन्हा। पट उर लाइ सोच अति कीन्हा॥ ३ ॥

अर्थ

हमें देखकर उन्होंने 'राम! राम! हा राम!' पुकारकर वस्त्र डाल दिया था। श्रीरामजी ने उसे माँगा, तब सुग्रीव ने तुरंत ही दे दिया। वस्त्र को हृदय से लगाकर श्रीरामचन्द्रजी ने बहुत सोच किया।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।

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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता