कह प्रभु सुनु सुग्रीव हरीसा

चौपाई ४, दोहा १२ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

कह प्रभु सुनु सुग्रीव हरीसा। पुर न जाउँ दस चारि बरीसा॥ गत ग्रीषम बरषा रितु आई। रहिहउँ निकट सैल पर छाई॥ ४ ॥

अर्थ

फिर प्रभु ने कहा--हे वानरपति सुग्रीव! सुनो, मैं चौदह वर्ष तक गाँव (बस्ती) में नहीं जाऊँगा। ग्रीष्म-ऋतु बीतकर वर्षा-ऋतु आ गयी। अतः मैं यहाँ पास ही पर्वत पर टिक रहूँगा।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तारा के विलाप पर श्रीराम के उपदेश, सुग्रीव का राज्याभिषेक और अंगद को युवराज पद का वर्णन है।

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तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक