धर्म हेतु अवतरेहु गोसाईं

चौपाई ३, दोहा ९ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

धर्म हेतु अवतरेहु गोसाईं। मारेहु मोहि ब्याध की नाईं॥ मैं बैरी सुग्रीव पिआरा। अवगुन कवन नाथ मोहि मारा॥ ३ ॥

अर्थ

हे गोसाईं! आपने धर्म की रक्षा के लिये अवतार लिया है और मुझे व्याध की तरह (छिपकर) मारा? मैं वैरी और सुग्रीव प्यारा? हे नाथ! किस दोष से आपने मुझे मारा ?।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।

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बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार