देखि इंदु चकोर समुदाई

चौपाई ४, दोहा १७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि इंदु चकोर समुदाई। चितवहिं जिमि हरिजन हरि पाई॥ मसक दंस बीते हिम त्रासा। जिमि द्विज द्रोह किएँ कुल नासा॥ ४ ॥

अर्थ

चकोरों के समुदाय चन्द्रमा को देखकर इस प्रकार टकटकी लगाये हैं जैसे भगवद्भक्त भगवान् को पाकर उनके [निर्निमेष नेत्रों से] दर्शन करते हैं। मच्छर और डाँस जाड़े के डर से इस प्रकार नष्ट हो गये जैसे ब्राह्मण के साथ वैर करने से कुल का नाश हो जाता है।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “शरद ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शरद ऋतु की निर्मल आकाश, स्वच्छ जल और शांत प्रकृति की सुंदर छटा का वर्णन है।

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शरद ऋतु वर्णन