वर्णानामर्थसंघानां रसानां

श्लोक १ · बालकाण्ड

श्लोक पाठ

वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥

अर्थ

अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंके करनेवाले वाणी और विनायककी मैं वन्दना करता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का श्लोक १ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा सरस्वती, गणेश, भवानी-शंकर, गुरु और श्रीराम की वंदना एवं दिव्य कृपा की याचना का वर्णन है।

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मंगलाचरण