बंदउँ प्रथम महीसुर चरना

चौपाई २, दोहा २ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥ २ ॥

अर्थ

पहले पृथ्वीके देवता ब्राह्मणोंके चरणोंकी वन्दना करता हूँ, जो अज्ञानसे उत्पन्न सब संदेहोंको हरनेवाले हैं। फिर सब गुणोंकी खान संत-समाजको प्रेमसहित सुन्दर वाणीसे प्रणाम करता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “गुरु वन्दना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु-चरण-वन्दना और उनकी कृपा से अज्ञान-नाश तथा रामकथा-बोध का वर्णन है।

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गुरु वन्दना