काम कोह मद मान न मोहा

चौपाई १, दोहा १३० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

काम कोह मद मान न मोहा। लोभ न छोभ न राग न द्रोहा॥ जिन्ह कें कपट दंभ नहिं माया। तिन्ह कें हृदय बसहु रघुराया॥ १ ॥

अर्थ

जिनके न तो काम, क्रोध, मद, अभिमान और मोह है; न लोभ है, न क्षोभ है; न राग है, न द्वेष है; और न कपट, दम्भ और माया ही है--हे रघुराज! आप उनके हृदय में निवास कीजिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद