जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे
जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे
चौपाई १, दोहा १२७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे। बिधि हरि संभु नचावनिहारे॥ तेउ न जानहिं मरमु तुम्हारा। औरु तुम्हहि को जाननिहारा॥ १ ॥
अर्थ
हे राम! जगत् दृश्य है, आप उसके देखने वाले हैं। आप ब्रह्मा, विष्णु और शंकर को भी नचाने वाले हैं। जब वे भी आपके मर्म को नहीं जानते, तब और कौन आपको जानने वाला है?
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद