चिदानंदमय देह तुम्हारी

चौपाई ३, दोहा १२७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

चिदानंदमय देह तुम्हारी। बिगत बिकार जान अधिकारी॥ नर तनु धरेहु संत सुर काजा। कहहु करहु जस प्राकृत राजा॥ ३ ॥

अर्थ

आपकी देह चिदानन्दमय है (यह प्रकृतिजन्य पञ्चमहाभूतों की बनी हुई कर्मबन्धनयुक्त, त्रिदेह-विशिष्ट मायिक नहीं है) और [उत्पत्ति-नाश, वृद्धि-क्षय आदि] सब विकारों से रहित है; इस रहस्य को अधिकारी पुरुष ही जानते हैं। आपने देवता और संतों के कार्य के लिये [दिव्य] नर-शरीर धारण किया है और प्राकृत (प्रकृति के तत्त्वों से निर्मित देह वाले, साधारण) राजाओं की तरह से कहते और करते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद