चरन राम तीरथ चलि जाहीं

चौपाई ३, दोहा १२९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

चरन राम तीरथ चलि जाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं॥ मंत्रराजु नित जपहिं तुम्हारा। पूजहिं तुम्हहि सहित परिवारा॥ ३ ॥

अर्थ

तथा जिनके चरण श्रीरामचन्द्रजी (आप) के तीर्थों में चलकर जाते हैं; हे रामजी! आप उनके मन में निवास कीजिये। जो नित्य आपके [रामनामरूप] मन्त्रराज को जपते हैं और परिवार (परिकर) सहित आपकी पूजा करते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद