अवगुन तजि सब के गुन गहहीं

चौपाई १, दोहा १३१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अवगुन तजि सब के गुन गहहीं। बिप्र धेनु हित संकट सहहीं॥ नीति निपुन जिन्ह कइ जग लीका। घर तुम्हार तिन्ह कर मनु नीका॥ १ ॥

अर्थ

जो अवगुणों को छोड़कर सब के गुणों को ग्रहण करते हैं, ब्राह्मण और गौ के हित में संकट सहते हैं, नीति-निपुणता में जिनकी जगत् में मर्यादा है, उनका सुन्दर मन आपका घर है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि का मिलन तथा प्रभु के सच्चे निवास का आध्यात्मिक उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद